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राहगीर अपने कबीरीयत के लिए पहचाने जाते हैं। राहगीर ने अपनी कविताई और गायकी के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों तथा विडंबनाओं पर कुठाराघात किया है। ‘समझ गए या समझाऊँ?’ राहगीर का दूसरा कविता-संग्रह है जिसमें कवि का चिर-परिचित तेवर मौजूद है।
कैसा कुत्ता है!' घुमक्कड़ कलाकार, गायक और कवि राहगीर की कविताओं का पहला संकलन है। इस संग्रह में राहगीर के लोकप्रिय गीतों के साथ बहुत-से ऐसे गीत और कविताएँ शामिल हैं, जो अभी तक न कहीं प्रकाशित हुए हैं और न ही प्रस्तुत।